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शुभ-भ्रमण

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शुभ-भ्रमण

13/02/2010

हे ! भारत भू के धन्य देव ...



भाल भभूत हे! भस्मीभूत
हे! शिखर चन्द्र, हें! तपस तंद्र
हे! बाम अंग में शैल सुता
करुनानिधान, तू योगरता
हे! हरे! पितु गणेश बालक
हे! दुःख हर्ता तुम जग पालक
हे! सिद्धयोग हे! महारथी
हे! दानवीर हे! सती-पति
हे! विषपायी हे! अविनाशी
वर देते अतुल, खुद वनवासी
इतना ही वर मुझको देना
भारति माँ के दुःख हर लेना
धन-धान्य प्रगति से भर देना
फिर पूजा का अवसर देना
हे ! भारत भू के धन्य देव
ये भू समृद्ध रहे सदैव

-वेदिका
महा-शिवरात्रि २०१० (चित्र मेरे स्वयं के द्वारा लिया गया है ,)

11/02/2010

कोई आया सा है ...

हुयी है दस्तक   दिलो- दिमाग में
देख लूँ बाहर    कोई आया सा  है

हर पहर   ये साथ कोई चल रहा 
कौन है जैसे     मिरा साया सा है

छूटने पीछे लगे          अपने मिरे
क्यूँ किसी इक गैर को पाया सा है

कोई छू न सके         न देखे मुझे
किस तरह का ये खुदा साया सा है

काम उसको सोचने के सिवा क्या
वक्त चारों पहर     का ज़ाया सा है

-वेदिका

09/02/2010

पल -पल -पल ये जीवन.....

पल -पल -पल ये जीवन कितना , समझौतों से भरा लगे है 
कभी लगे ये जीवन "दर्शन " कभी एक "मसखरा"  लगे    है 

 रेता - बेता - अंजर - बंजर, भूखा - प्यासा -अस्थि - पंजर
 नदियाँ-नाले -झरने-ताले, थकन अगन जो प्यास बुझा ले 
 क्षन भर की मरीचिका या फिर प्रतिबिम्बों से भरा लगे है 
कभी लगे ये जीवन  "दर्शन " कभी एक  "मसखरा" लगे है

जीवन- पर्वत हम आरोही,  जीवन -माया   हम   निर्मोही 
ज्ञान वान विज्ञानी कह लो,    या बचपन शैतानी कह लो 
साधुवाद का भास करा के,     पगलाया सिरफिरा लगे  है 
कभी लगे ये जीवन "दर्शन " कभी एक  "मसखरा" लगे है  

मिर्च-मसालों का तीखापन, या  पानी  जैसा     फीकापन
अपनी आँखें अपना अंजन,   नमी परायी  पर अपनापन
आठ साल का जख्म पुराना,     ताजा- ताजा हरा लगे है 
कभी लगे ये जीवन "दर्शन " कभी एक "मसखरा" लगे है  
                                          
                                                     -वेदिका
                                                     २० जनवरी ०३

07/02/2010

विदाई के अवसर पर.....

मैया के रोये से नदिया बहत है 
बाबुल के रोये बेला ताल 
भैया के रोये मेरी छतिया फटत है 
भौजी के जियरा कठोर 

बुंदेलखंड में विवाह में विदाई के अवसर पर गाया जाने वाला मार्मिक लोकगीत के बोल .....