मेरे साथी ....जिन्होंने मेरी रचनाओं को प्रोत्साहित किया ...धन्यवाद

शुभ-भ्रमण

नमस्कार! आपका स्वागत है यहाँ इस ब्लॉग पर..... आपके आने से मेरा ब्लॉग धन्य हो गया| आप ने रचनाएँ पढ़ी तो रचनाएँ भी धन्य हो गयी| आप इन रचनाओं पर जो भी मत देंगे वो आपका अपना है, मै स्वागत करती हूँ आपके विचारों का बिना किसी छेड़-खानी के!

शुभ-भ्रमण

14/08/2010

चले गये हा! जीव से प्रान

स्वागत में हम थे आतुर
अधरों पर लेकर मुस्कान
जाने कब और कैसे ईश्वर
चले गये हा! जीव से प्रान

शत शत स्वप्न सजा नैनों में
मधुरस घोला था बैनों में
लेकिन श्रम यह शून्य हो गया
धुल धूसरित सब धन धान
चले गये हा! जीव से प्रान
 
क्या प्रकृति के  मन को भाया
सुख-सुख से कैसा भरमाया
पहले दृष्टि-दया दिखलाई
बड़ा कुटिल फिर हुआ विधान
चले गये हा! जीव से प्रान

7 टिप्‍पणियां:

  1. आजकल आपकी रचनात्‍मकता जोरों पर है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वेदिका जी
    नमस्कार !
    आपके ब्लॉग पर आ'कर तो हम बंध गए …
    मुझे सहज विश्वास नहीं हो रहा कि यहां एक छंद साधिका विद्यमान है !
    और छंद पर नियंत्रण भी कमजोर नहीं ।
    बहुत सारी रचनाएं पढ़ीं आपकी , असमंजस में हूं … किस किस पर कमेंट न दूं !!
    आप मुझे इतनी छूट दें , कम लिखे को ज़्यादा मानलें , कृपया ।
    आपके लगभग सारे गीत सराहनीय हैं ।
    कहीं कहीं शब्द चयन में , अथवा वर्तनीगत त्रुटि है । अन्यथा सुंदर संप्रेषणीय और भाव पूर्ण है हर रचना ।
    बधाई और मंगल कामनाएं !
    और हां , जीव मात्र से आपका स्नेह देखते ही बनता है । बहुत बढ़िया !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  3. … और हां , आपकी मुस्कुराहट बहुत सुपरिचित - सी है !
    मुबारक …
    :)
    :)

    उत्तर देंहटाएं
  4. Likhna ek kala hai aur aap isme nishnaat hain.Prem ki anubhuti virah jwal me tap kar hi hoti hai..

    Bahut acche aur bandhe se saheje huye hain aapke chhand..Badhayi..likhna chhoriyega nahin

    samay mile to www.nikharkhan.com pe bhi vicharan kar sakti hain..

    उत्तर देंहटाएं

विचार है डोरी जैसे और ब्लॉग है रथ
टीप करिये कुछ इस तरह कि खुले सत-पथ