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शुभ-भ्रमण

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शुभ-भ्रमण

24 अप्रैल 2013

विरह क्या आत्म दाह होता ...!

विरह क्या
आत्म दाह होता ...!

अश्रु अतिथि से आते है
स्वागत हे! नैना गाते है
हा ! पीड़ा, हा ! करुण रागिनी
सबको दूँ न्योता ...!

विरह क्या आत्म दाह होता ...!

स्मृतियाँ फेरे लेती है
घड़ी घड़ी घेरे लेतीं है
हा ! विदाई, हा ! वियोग; इस
क्षण, शुभ विवाह होता ...!

विरह क्या, आत्म दाह होता ...! 

                       गीतिका 'वेदिका'
                       11/04/06 6:45 अपरान्ह 

23 अप्रैल 2013

तुझे पाया बेवफ़ा

जब भी पाया तुझको

कर गया चाक ज़िगर
तेरा साया बेवफ़ा

दिल है नादान सनम
तुझ पर आया बेवफ़ा

हम तो तेरे ही बने
तू पराया बेवफ़ा

तोड़ी सब कसमें क्यों
या ख़ुदाया बेवफ़ा
                                                                                       ...गीतिका 'वेदिका'

17 अप्रैल 2013

सुमरि होरी रे! / लम्टेरा विधा

बुन्देली क्षेत्र में फाग के अवसर पर पुरुष और महिलाओं के समूह द्वारा गाया जाने वाला गीत

 सुमरि होरी रे! / लम्टेरा विधा

सुमरि  होरी रे!
आई होली के लेके रंग बिरंगे अनुराग रे
सुमरि होरी रे!

कौना के शिव कैलाश बसे जू हो
कौना के श्याम बसे वृन्दावन रे
सुमरि होरी रे!

राधा चली घट रंग भरो जू 
गौरा चली ले के रंग अबीर को थार रे
सुमरी होरी रे!

कौना सी  सुंदर नारी वन में बसे
संगे बसे लाला लखन , राम भरतार रे
सुमरि  होरी  रे!

राम भगत की रंग रंगीली होली
हनुमत करे लाल सिंदूर को सिंगार रे
सुमरि होरी रे!

रखो वेदिका लाज, कलम खों रंग दो 
संग मिले एक रंग पिया जी का प्यार रे!
सुमरि होरी रे!

गीतिका 'वेदिका'
21-03-2013....11:19 अपरान्ह