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शुभ-भ्रमण

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शुभ-भ्रमण

27/03/2011

"आजाओ ना मीत एक मुस्कान लिए "

आजाओ ना मीत
एक मुस्कान लिए


दीवारों पे जाले है
आँखों के घेरे काले है
रूखे मेरे निवाले है
बैठी हूँ आँखों में
भरी थकान लिए


द्वार पड़े वे झाड़
हटा दो
आओ निकट
दूरियां घटा दो
आजाओ आशाओं
भरा जहान लिए

बंद पड़ी खिड़की खोलोगे
ताज़ी सी खुशबु घोलोगे
धीरे से तुम जब बोलोगे
आँखे रो देंगी
तेरा ही ध्यान लिए


6 टिप्‍पणियां:

  1. विरह!!
    खूबसूरत लगी कविता..:)

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  2. विरह!!
    खूबसूरत लगी कविता :)

    उत्तर देंहटाएं
  3. Birha ki peeda ka bahut marmik darasthan apki kavita me.. bahut sundar anubhuti..

    उत्तर देंहटाएं
  4. दीवारों पे जाले है
    आँखों के घेरे काले है
    रूखे मेरे निवाले है
    बैठी हूँ आँखों में
    भरी थकान लिए
    bahut khoobsoorat andaj.

    उत्तर देंहटाएं
  5. सच्चे मनोभावों की प्रशंसनीय प्रस्तुति

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  6. बंद पड़ी खिड़की खोलोगे
    ताज़ी सी खुशबु घोलोगे
    धीरे से तुम जब बोलोगे
    आँखे रो देंगी
    तेरा ही ध्यान लिए. bahut sundar.

    उत्तर देंहटाएं

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