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शुभ-भ्रमण

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शुभ-भ्रमण

11/12/2010

मेरे घर आये है साजन

मेरे घर आये है साजन
आँगन निखर गया

बरसी थी नैनो की बदली
धो गयी सब काजल और कजली
रोग शोक दुःख पीड़ा
जाने किधर गया

हम मिलकर तुमसे हरसाए
सबको अपने सजन दिखाए
खूब खूब खुद पे इतराए
विरह वेदना का रोना
सब बिसर गया

4 टिप्‍पणियां:

  1. काफी अच्छी कवितायें हैं आपके ब्लॉग पे..

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर भाव,,,
    अच्छी कविता...

    बहुत दिनों से कोई नयी लिखी नहीं???

    उत्तर देंहटाएं

विचार है डोरी जैसे और ब्लॉग है रथ
टीप करिये कुछ इस तरह कि खुले सत-पथ